बाल देखरेख एवं विकास के मुददों पर दो दिवसीय संगोष्ठी संम्पन्न

लखनऊ । उत्तर प्रदेश फोर्सेस एव सेव दी चिल्डृेन के संयुक्त तत्वावधान में बालदेखरेख एवं विकास के मुददों पर दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन पारिजात गेस्ट हाउस इन्दिरा नगर लखनऊ किया गया।
कार्यकम के पहले दिन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सेव द चिल्ड्ेन राज्य प्रतिनिधि सुरजीत चटर्जी ने बताया कि प्रारंभिक शिशुकाल से जीवन के पहले छह वर्षों का बोध होता है। यह सबसे महत्वपूर्ण दौर के तौर पर जाना जाता है, जब विकास काफी तेजी से होता है और आजीवन संचयी ज्ञान और मानवीय विकास की बुनियाद रखी जाती है। इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि प्राथमिक वर्षों में मस्तिष्क का जो विकास होता है, वह ऐसा रास्ता है, जो आजीवन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, व्यवहार और शिक्षा पर असर डालता है। उन्होने बताया कि 2011 की जनगडना के अनुसार भारत में 0-6 वर्ष के आयुवर्ग के लगभग 15 करोड़ 87 लाख शिशु हैं प्राथमिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा (ईसीसीई) आजीवन शिक्षा और विकास के लिए अपरिहार्य बुनियाद है, जिसका शिक्षा के प्राथमिक चरण की सफलता पर गहरा असर पड़ता है। इसी वजह से यह जरूरी हो जाता है कि ईसीसीई को प्राथमिकता दैं और मांग के अनुरूप संसाधन मुहैया कराकर पर्याप्त तौर पर निवेश करें। इस लिए यह काफी महत्वपूर्ण विषय है इस दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सेवा की सुजन जी ने कहा कि आज के परिवेश में महिलाओं एवं बच्चों को की स्थिति को ध्याान में रखते हुए काम करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कह कि सभी छोटे बच्चेा के लिए प्रारमिक बाल देख रेख एवं पूरे दिन के लिए मुुुफत एवं गुणवत्तापूर्ण व समेकित प्रारम्भिक देखरेख की आवश्यकता पर चर्चा की । कार्यक्रम के दौरान एलाइन्स फार चाइल्डकेयर की देविका जी ने कहा कि उत्तर भारत के राज्यों में छः साल से कम उम्र के बच्चों का अधिकार संरक्षण शाला पूर्व शिक्षा एवं गुणवत्ता पूर्ण देखभाल पर केन्द्रित कर सरकार की नीतियाॅं जमीनी हकीकत, गैप्स, चुनौतियाॅं एवं साझा पहल के मुद्दों पर कार्यशाला का आयेाजन किया जा रहा है
फोर्सेस के उद्भव राष्ट्रीय स्तर पर उ0प्र0 में और इसकी जरूरतों के साथ-साथ उ0प्र0 में सरकार
द्वारा 6 वर्ष के नीचे के बच्चों के लि विभिन्न योजनाओं को सदन के समक्ष रखा प्रतिभागियांे ने दिल्ली, उ0प्र0, उत्तराखण्ड, गुजरात आदि विभिन्न राज्यों में बच्चों के स्वास्थ्य, अधिकार संरक्षण् एवं देखभाल पर चलाई जा रही योजनाओं की समीक्षा की और छोटे बच्चों के लिए पूर्णकालिक (डे केयर सेण्टर) के साथ-साथ आई0सी0डी0एस0 के साथ ही शाला पूर्व शिक्षण को लागू करने एवं दुर्गम परिस्थिति में फॅसे बच्चों को देखभाल एवं सेवाओं की पहुॅंख् की माॅंग उठाई।वी0एच0एन0सी0 को सक्रिय किये जाना, समुदाय एवं सेवा प्रदाताआंे के साथ जेण्डर एवं अन्य आधार पर भेदभाव को भी मुद्दे के रूप में सदन ने चिहिन्त किया।
निपसिड के उपनिदेशक डा0 एम0 ए0खान ने सरकार द्वारा चलयी जा रही कार्यक्रम तथा क्रच की आश्यकता पर बल दिया उन्होने बताया कि छोटे बच्चों के लिए फोर्सेस द्वारा की जा रही प्रयास में आगनवाडी केन्दो के लिए बेसिक सुविधाओं को को बेहत प्रयास की आश्यकता है।
इन माॅंगों एवं गैप्स तथा चुनौतियों के मध्य नजर साझी रणनीति पर चचायें की गई। प्रतिभागियों में उ0प्र0 फोर्सेस के विश्वम्भर भाई, शिशुपाल,प्रीति राय अर के वर्मा,कृष्णाख् वीके रायथानेश्वर,जेे0पी0 शार्मा,वी पी चाण्डेय, डा0वीएस सिंह सहित उत्त्र प्रदेश सहित दिल्ली के कुल 40 प्रतिभागियो सदस्यों ने अपने विचार साझा किये।
कार्यशाला में विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता संयुक्त रूप से एलाइन्स फार चाइल्डकेयर सुश्री देविका जी, राष्ट्रीय फोर्सेस के बासंती रामन, सेवा गुजरात की सुसान सेव दी चिल्ड्रेन, भारत (लखनऊ) के सुरोजीत चटर्जी, आई0सी0डी0एस0 यूनियन सुश्री वीना गुप्ता,ए संचालन उ0प्र0 फोर्सेस के संयोजक श्री रामायण जी ने किया।