दीपालय का 39 वां स्थापना दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया

39 साल पहले, इस दिन 16 जुलाई 1979 में, दीपालय नामक सिविल सोसाइटी संगठन का जन्म हुआ था। पांच बच्चों, दो शिक्षकों और अपने संस्थापक सदस्यों द्वारा 17,500 रुपये के निवेश के साथ विनम्र कार्य की शुरुआत की। दीपालय एक लंबा सफर तय कर चुका है; आज दिल्ली-एनसीआर में सबसे बड़े परिचालन एनजीओ के रूप में उभरते हुए, इसने भारत के छह राज्यों और छह अलग-अलग क्षेत्रों में उपस्थिति स्थापित की है (शिक्षा, संस्थागत देखभाल, महिला सशक्तिकरण, व्यावसायिक प्रशिक्षण, हेल्थकेयर, और दिव्यांग)।

दीपालय के 39 वें फाउंडेशन दिवस (जिसे दीपालय दिवस के रूप में जाना जाता है) आज दीपालय स्कूल कालकाजी एक्सटेंशन ऑडिटोरियम में सांस्कृतिक प्रदर्शन व मनोरंजक गतिविधियों के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम वरिष्ठ अधिकारियों, दीपालय के कार्यकारी समिति के सदस्यों के द्वारा सम्बोधित किया गया। वरिष्ठ स्तर से लेकर जूनियर कर्मचारियों सहित मनाये गये इस समारोह में “विविधता में एकता” को दर्शाया गया।

इस कार्यक्रम की शुरुआत दीपक प्रज्वलन और दीपालय के मिशन-विज़न के पढ़ने के साथ की गयी।

श्री ए जे फिलिप, सचिव और मुख्य कार्यकारी, दीपालय ने अपने स्वागत भाषण में समाज की भलाई के लिए एकता और सत्यनिष्ठा पर बल दिया। “हमे समुदायों के प्रति ईमानदारी और वचनबद्धता के साथ सेवा करते हुए अभी 39 वर्ष ही पूरे हुए है, अभी हमें और आगे बढ़ना है। हमें संघर्ष और सीमाओं से ऊपर उठना है और किसी भी तरह से समाज में योगदान देने के लिए एकसाथ सभी को काम करना चाहिए,” श्री फिलिप ने कहा।

श्री वाई चैकोचान, प्रेजिडेंट, दीपालय, 39 साल पहले सुनहरे दिनों में वापस चले गए, जब दीपालय की शुरुआत उनके ड्राइंग रूम से की गयी थी, कुछ आदरणीय व्यक्तियों द्वारा जिनके पास समाज को वापस देने का एक आम और दृढ़ मिशन था। “कई बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद, आज हम इस मुकाम पर पहुचें है जहाँ पर हमें समाज की सेवा करते हुए गर्व महसूस होता है। मैं आशा करता हु की दीपालय आने वाले कुछ सालों में और नै ऊचाइयों को छू पायेगा,” श्री चैकोचान ने कहा।

डॉ जॉर्ज जॉन, फॉर्मर वाईस चांसलर, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, झारखंड (जो हाल ही में दीपालय के बोर्ड में शामिल हुए है) ने कहा कि उनकी राय में, दीपालय के प्रबंधन व नियम विधि देश के कई सरकारी स्कूलों के लिए एक आदर्श हो सकता है।

डॉ एनी मैथ्यू, बोर्ड मेंबर, दीपालय ने पिछले पांच वर्षों में संगठन की उपलब्धियों के बारे में बात की। साथ ही कार्यक्रम में श्री सखी जॉन, बोर्ड के सदस्य और डॉ (प्रोफेसर) मैरी अब्राहम, जनरल बॉडी के सदस्य भी मौजूद थे।

150 से अधिक दीपलाय परिवार के सदस्यों (जिसमे कार्यकर्ताओं सहित इंटर्न्स और वालंटियर्स भी थे) ने मंच पर अपने कलाओं का प्रदर्शन किया। प्रत्येक प्रदर्शन अपने आप में आकर्षण का एक केंद्र था, पर जिनके लिए लोगो ने विशेष प्रशंशा की वह दीपालय एसक्यूईपी प्रोजेक्ट (एसडीएमसी स्कूल, ओखला) द्वारा विभिन्न गीत; माइक्रोफाइनेस प्रोजेक्ट, तावड़ू द्वारा “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के संदेश पर प्रकाश; दीपालय के स्पेशल यूनिट, संजय कॉलोनी द्वारा फ्यूज़न डांस; और दीपालय एचआरसी द्वारा “जिंदगी का सफर” एक स्किट जो जीवन के बिभिन्न चरणों के माध्यम से मनुष्यों में सामाजिक-भावनात्मक खासियत को दर्शाया गया।

कार्यक्रम में कुछ गीत, कविताएं, ग़ज़ल और डांस प्रदर्शन भी किये गए, जिनमे से कुछ हरियाणा और राजस्थान के गीतों को जोड़ा गया; कुछ गीत लोगों को 70 और 80 के दशक में वापस ले गये। दीपालय स्कूल गुस्बेथी द्वारा “श्रीदेवी को श्रद्धांजलि” देते हुए एक अदभुत नृत्य का प्रदर्शन किया गया ये। यह पूरी तरह से यादगार और जोश से भरा दिन रहा।

श्रीमती जसवंत कौर, कार्यकारी निदेशक, दीपालय ने सभी को धन्यवाद देते हुए अगले साल एक विशाल और बड़े उत्सव के साथ आने का वादा करते हुए राष्ट्रीय गान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।