मिशन मीरा के तहत महिला द्वारा महिलाओं के लिए उदयपुर में ई-रिक्शा

Mission Meera

श्रीनाथजी सेवा संस्थान की ओर से मिशन मीरा के तहत उदयपुर, राजस्थान में महिलाओं को ई-रिक्षा का परीक्षण दिया जा रहा है. ताकि महिलाऐं आत्म निर्भर होकर आर्थिक रूप से सक्षम हो सके.

श्रीनाथजी सेवा संस्थान और प्रादेशिक परिवहन विभाग द्वारा उदयपुर में मिशन मीरा प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई. मिशन मीरा का मुख्य उद्देश्य महिलाओं द्वारा महिलाओं की सुरक्षा करना है. मिशन मीरा के तहत महिओलाओं को ई-ऑटोरिक्शा प्रदान किया जायेगा.

ई-ऑटोरिक्शा के संचालन और चलने का प्रशिक्षण भी श्रीनाथजी सेवा संस्थान और प्रादेशिक परिवहन विभाग द्वारा दिया जाता है. मिशन मीरा के तह महिलाओं महिला रोजगार के लिए जून 17 में प्रशिक्षण दिया गया. इस प्रशिक्षण के लिए तीसरे बैच को ई-रिक्शा चलने के लिए शुरू किये गए बैच का उद्घाटन उदयपुर के जिला कलेक्टर ने किया. इस अवसर पर मिशन मीरा के प्रोजेक्ट संचालक और प्रादेशिक परिवहन अधिकारी डॉ. मन्ना लाल रावत, श्रीनाथजी सेवा संस्थान की अध्यक्ष साधना खथुरिया, जिले प्रमुख अधिकरीगण और नागरिक मौजूद थे. इस समारोह में पुराने बैच में प्रशिक्षित 25 महिलाओं को भी प्रशिक्षण के प्रमाण पत्र और ई-रिक्शा चलाने के लाइसेंस प्रदान किये गए.
अशोक लीलैंड की अशोक लीलैंड वाहन चालक प्रशिक्षण संस्थान द्वारा रेलमगरा, उदयपुर में महिलाओं को ई-रिक्शा और कार चलाने का प्रशिक्षण दिया गया है.
इसमें घरेलु महिओलाओं को श्रीनाथजी सेवा संस्थान द्वारा ई-रिक्शा के लिए मिशन मीरा में शामिल करने के लिए उदयपुर शहर की दस बस्तियों में सर्वे करवाया गया. सर्वे में महिलाओं को मिशन मीरा से वागत करवाया गया और इससे जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया. मिशन मेरा उदयपुर के प्रादेशिक परिवहन अधिकारी डॉ. मन्ना लाल रावत द्वारा प्रारंभ किया गया है ताकि महिलाओं को रोजगार मिल सके और महिलाओं के परिवहन के लिए महिला रिक्शा चालक उपलब्ध हो से. श्रीनाथजी सेवा संस्थान की अध्यक्ष साधना खथुरिया ने अपनी टीम के साथ मिलकर मिशन मीरा को मूर्त रूप देने की शुरुआत की जिसके तहत उदयपुर में मिशन मीरा परियोजना कार्यरूप में एक अनुकरणीय परियोजना के रूप में सामने आई है.

एनजीओ में नौकरी के नाम पर युवाओं से करोड़ों रूपये लेकर ठग फरार

दिल्ली के एक एनजीओ पर  मथुरा के करीब दस हजार युवाओं को नौकरी देने का झांसा देकर करोड़ों रूपये की धोखाधड़ी करने में मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई है. आरोप है कि एनजीओ ने बाल कल्याण विभाग और शिक्षा क्षेत्र में नौकरी दिलाने का लालच देकर बेरोजगार युवाओं से पैसे ठगे. सभी पीड़ित युवक-युवतियों ने मदद के लिए मथुरा के जिला मैजिस्ट्रेट दफ्तर में शिकायत  है.
शिकायतों के मुताबिक, सेंट पीटर एंड मदर टेरेसा चिल्ड्रन एजुकेशन एंड वेलफेयर नाम के एक एनजीओ ने हजारों युवाओं को मुफ्त प्रशिक्षण और सुपरवाइजर व राज्य निदेशक जैसे पदों पर नियुक्ति का झांसा देकर बेवकूफ बनाया. इसके बदले एनजीओ ने सभी युवाओं से 80,000 से लेकर 1 लाख रुपये तक जमा करने को कहा. पैसे देने के बाद युवाओं को 20,000 तक की नौकरी और 5 साल के अनुबंध का फर्जी कागज दिया गया.
युवाओं का भरोसा जीतने के लिए इस एनजीओ ने अपने कुछ कर्मचारियों को कुछ महीने तक वेतन भी दिया. एनजीओ ने मथुरा में पिछले नवंबर से अपना काम शुरू किया था. इस संगठन का एक दफ्तर मथुरा-गोवर्धन सड़क पर था, जबकि इसका मुख्य ऑफिस नई दिल्ली के बदरपुर इलाके के एक पते पर पंजीकृत दिखाया गया था. आरोप है कि पैसा बटोरने के बाद एनजीओ के सदस्य अब करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गए हैं.

बिहार में एनजीओ के जरिए धोखधड़ी करने वाले ठग जेल में भेजे

बिहार पुलिस ने ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले एक एनजीओ के संचालक को पुलिस ने पटना में गिरफ्तार किया है.  सिविल लाइन पुलिस ने कन्या कल्याण सोसायटी नामक एनजीओ के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को गिरफ्तार किया है.
बिहार के सीपत क्षेत्र  के ग्राम कौडिय़ा की माधुरी लता राठौर की पुलिस को दी गई रिपोर्ट के आधार पर इनको पकड़ा गया है. महिला ने शिकायत में बताया था कि कन्या कल्याण सोसायटी नाम की एनजीओ जिसका कार्यालय व्यापार विहार में है, उसके निदेशक राजेश कुमार सिंह के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में एजेंट बनाकर धोकधडी की गई है. आरोप में बताया कि अभियुक्त जावों में जाकर कक्षा एक से 12 वीं तक की छात्राओं के नाम पर ग्रामीणों से फार्म भरवाकर पांच सौ रूपये ले रहे है. संस्था के जरिये चल रही योजना की बात कहकर इन लोगों द्वारा बालिकाओं को 15 सौ रूपये छात्रवृत्ति देने का झांसा देकर और उन बालिकाओं की आयु 18 वर्ष होने पर 50 हजार रूपये देने के आश्वासन की योजना बताकर धोखाधड़ी की गई है.
पुलिस जाँच में सामने आया कि बिहार के पटना निवासी राजेश कुमार सिंह पिता कमलेश सिंह ने वर्ष 2013 में बिलासपुर में कन्या कल्याण सोसायटी नाम से एनजीओ बनाकर व्यापार विहार में कार्यालय खोला. इसके बाद ग्रामीण क्षेत्र में एजेंट बनाये गए. उसने और उसके सहयोगियों ने लोगों को ठगने के  लिए एक योजना बनायी जिसमें कहा गया कि कक्षा पहली से 12 तक पढ़ने वाली छात्राओं के नाम प्रति वर्ष 500 रुपए जमा करने पर छात्रा को प्रतिवर्ष 1500 रुपए तक छात्रवृत्ति दी जाएगी. उसके 18 वर्ष पूरे करने पर 50 हजार अनुदान देने का झांसा भी दिया गया. एजेंटों ने गांव-गांव में घूमकर सदस्य बनाकर रुपए जमा किए लेकिन समय  पूरा होने पर लाभार्थियों को छात्रवृत्ति, विवाह अनुदान राशि और जमा रकम वापस नहीं की गई. लोगों ने जब रुपए वापस मांगे तो संस्था के संचालक व सचिव मोहम्मद ओसामा एजेंटों को धमकाने लगा. बाद में अपराधी ठग कार्यालय बंद कर फरार हो गए.
इस मामले की माधुरी लता राठौर ने आईजी पुलिस को लिखित शिकायत रिपोर्ट दी थी. महिला ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी कि कन्या कल्याण सोसायटी चलने वालों के झांसे में आकर सैकड़ों ग्रामीण ठगी शिकार हो गए हैं. शिकायत के बाद सिविल लाइन पुलिस मामला दर्ज कर सोसायटी के सचिव मोहम्माद ओसामा को गिरफ्तार कर, बाद में अन्य को भी पकड़ा और उनसे पूछताछ की गई. पुलिस ने शिकायत की जांच कर सचिव मोहम्मद ओसामा को गिरफ्तार किया जिसे बाद में जेल भेजा. पुलिस ने मुख्य आरोपी को पटना के शंभुकुड़ा में छापा मारकर गिरफ्तार किया. इसके अलावा अध्यक्ष मोहर सिंह कुसरो, उपाध्यक्ष अशोक सिंह जगत को गिरफ्तार किया है. संचालक राजेश कुमार सिंह निवासी शंभुकुंड़ा थाना नौबतपुर पटना बिहार, अध्यक्ष मोहर सिंह कुसरो ग्राम दमिया थाना पाली जिला कोरबा, उपाध्यक्ष अशोक सिंह जगत निवासी मादन थाना पाली जिला कोरबा को धारा 420, 34 के तहत गिरफ्तार किया है.
मुख्य आरोपी राजेश सिंह ने पूरे क्षेत्र में एक लाख से अधिक सदस्य बनाकर 5 करोड़ रुपए जमा किए. गिरफ्तार अभियुक्तों ने लोगो से ठगी के जरिये इक्कठ्ठा किए गए धन से प्रोपर्टी और महंगी कार भी खरीदी है. इस रकम से आरोपी ने गायत्री नगर में 47 लाख रुपए का शानदार मकान खरीदा. इसके अलावा दो चार पहिया वाहन खरीदे थे. पुलिस ने मकान, वाहन और इनके दस्तावेज भी जब्त किये है.

Hyderabad High Court accepted NGO letter as PIL

Hyderabad High Court has accepted as a PIL a letter written by Miners, associate degree nongovernmental organization from Godavarikhani, that delivered to the notice of the court the substandard boots provided by unscrupulous traders and therefore the silence of the Singareni Colleries management despite the actual fact that the boots provided were so much below the standard and ISI standards prescribed by Singareni Company and therefore the Bureau of Indian Standards.
The NGO claimed that it’s related to CPI (ML) party in Warangal associate degreed was an underground outfit within the past and conjointly that it’s currently acquire open and dealing for the individuals during a democratic method. As a part of this method we have a tendency to wrote letters to the Singareni authorities and therefore the errant suppliers to rectify the error and forestall the injury that these boots would cause to the protection of the miners United Nations agency add precarious conditions. Since there was no response, the nongovernmental organization took to legal battle.

The NGO’s legal proponent Om Shanti Brihannala wrote a letter to HC’s CJ seeking action against the suppliers of such substandard boots. This letter was born-again as a PIL and is listed for hearing on weekday.

 

‘तीस्ता सीतलवाड़ ने एनजीओ को मिले पैसे को शराब में लुटाया’

तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और उन्हें फंड दुरुपयोग मामले में ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। इससे पहले गुजरात सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उन्होंने एनजीओ को मिले पैसे का इस्तेमाल शराब में लुटा दिया।
जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस ए.एम.खानविलकर की पीठ तीस्ता और उनके पति के बैंक खातों को फ्रीज करने के मामले में सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान एडीशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि तीस्ता ने एनजीओ के पैसे का इस्तेमाल अपने निजी खर्चों और शराब पर किया।

गुजरात सरकार के वकील मेहता ने कहा कि तीस्ता ने शराब पर किए खर्चों को धर्मनिरपेक्ष शिक्षा की श्रेणी में दिखाया। सरकारी वकील ने कोर्ट से तीस्ता को हिरासत में लेकर पूछताछ की इजाजत मांगी। वहीं तीस्ता के वकील कपिल सिब्बल और अपर्णा भट्ट ने कहा कि तीस्ता की छवि खराब करने के लिए शराब सेवन का मुद्दा उठाया जा रहा है।

सिब्बल ने कहा कि फोर्ड फाउंडेशन ने शराब सहित सभी व्ययों को मंजूरी दी है। पिछले 7 सालों में शराब पर केवल 7,850 रूपये खर्च किये गये जोकि कोई अपराध नहीं है। सिब्बल ने यह भी कहा कि जब फाउंडेशन ने कोई शिकायत नहीं की तो अपराध का सवाल ही नहीं उठता। सिब्बल ने तीस्ता का बचाव करते हुए यह भी कहा कि तीस्ता ने किसी के साथ धोखा नहीं किया। तीस्ता को पैसे सरकार ने नहीं बल्कि फाउंडेशन ने दिए थे। और अपने काम के लिए लोगों से मिलना और उनके सत्कार के लिए पैसा खर्च करना गलत नहीं हैं।
(Source: http://www.amarujala.com)

गैर सरकारी संगठनों को सरकारी फंडिंग के मामले की सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि जो एनजीओ बैलेंस शीट देकर अपना लेखाजोखा न दें उनके खिलाफ वसूली के लिए सिविल और दीवानी कार्रवाई हो.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को NGO और स्वैच्छिक संस्थाओं को दिए जाने वाले  वाले सरकारी फंड के नियंत्रण को लेकर कानून बनाने का सुझाव दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार की सरकारी पैसे का दुरुपयोग करने वाले NGO के लिए गाइडलाइन काफी और प्रभावी नहीं हैं इसलिए संगठनों के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल कारवाई के लिए कानून की जरूरत है. ये मामला बडी रकम का है लेकिन अभी तक इसे नियंत्रण करने के लिए कोई कानून नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से 8 हफ्ते में इस बारे में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था कि वो कानून बनाएंगे या नहीं.

कोर्ट ने कहा था कि इस आदेश से NGO के खिलाफ चल रही क्रिमिनल कारवाई पर कोई असर नहीं पडेगा वहीं केंद्र ने कोर्ट को बताया था कि 2002 से 2009 के बीच 4756 करोड रुपये दिए गए गए जबकि राज्यों की ओर से 1897 करोड रुपये दिए गए. औसतन हर साल 950 करोड रुपये संस्थाओं को दिए गए. वहीं कपार्ट ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 718 NGO और स्वैच्छिक संस्थाओ के खिलाफ कारवाई करते हुए ब्लैकलिस्ट किया गया है. जिसमें से 15 को डीलिस्ट  किया गया है. 159 के खिलाफ  FIR दर्ज कर कानूनी कारवाई की जा रही है.

केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि गाइडलाइन को लेकर 76 मंत्रालयों को सुझाव भेजा गया है.5 अप्रैल को सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा था कि  सरकारी फंड का दुरुपयोग करने वाले एनजीओ (गैर सरकारी संगठन) को लेकर केंद्र कड़े नियम बनाने की तैयारी में है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि केंद्र ने ड्राफ्ट गाइडलाइन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है. जो एनजीओ झूठी सूचनाओं के आधार पर सरकार से फंड लेगा, उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा. देश से सभी एनजीओ को फिर से नीति आयोग में आनलाइन पंजीकरण कराना होगा और एनजीओ को एक यूनिक आईडी दी जाएगी.एनजीओ को आडिट एकाउंट, इनकम टैक्स रिटर्न के अलावा काम करने के क्षेत्र और मुख्य कार्यकर्ताओं की जानकारी देनी होगी.

एनजीओ को उसके अंदरूनी कामकाज और नैतिक स्टेंडर्ड के मूल्यांकन के बाद ही मान्यता दी जाएगी. मान्यता देने के बाद एनजीओ को मिलने वाले फंड इस्तेमाल के मूल्यांकन के लिए तीन टियर छानबीन होगी. फंड का दुरुपयोग करने वाले एनजीओ और स्वैच्छिक संस्थाओं के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. हस्ताक्षरकर्ता सामूहिक रूप से फंड वापस करने के लिए जवाबदेह होंगे. अगर सरकार किसी एनजीओ के प्रोजेक्ट से संतुष्ट नहीं होती या उसे लगेगा कि गाइडलाइन का उल्लंघन हो रहा है तो तुरंत प्रभाव से फंड देने पर रोक लगाने का सरकार को अधिकार रहेगा.दरअसल देश भर के गैर सरकारी संगठन यानी एनजीओ को सरकारी फंडिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई कर रहा है.

पिछली सुनवाई में देश भर के करीब तीस लाख गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के हिसाब-किताब का कोई लेखाजोखा न होने और एनजीओ को नियमित करने का कोई तंत्र न होने पर  सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया था.कोर्ट ने 31 मार्च तक सभी एनजीओ का आडिट कर कोर्ट मे रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था. इसके साथ कहा है कि जो एनजीओ फंड के दुरुपयोग के दोषी पाए जाएं उनके खिलाफ आपराधिक और दीवानी कार्रवाई की जाए. कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह एनजीओ को नियमित करने उन्हें मान्यता देने और उनकी फंडिंग के बारे में दिशानिर्देश तय करे.कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि एनजीओ को दिया गया फंड जनता का पैसा है. जनता के पैसे का हिसाब किताब रखा जाना चाहिए जो इसका दुरुपयोग करें उन पर कार्रवाई होनी चाहिए.सीबीआई की ओर से सुप्रीमकोर्ट में दाखिल की गई रिपोर्ट के मुताबिक देश भर मे करीब 32 लाख 97 हजार एनजीओ हैं जिसमें से सिर्फ 3 लाख 7000 ने ही अपने खर्च का लेखाजोखा सरकार को दिया है. बाकी के एनजीओ ने कोई बैलेंस शीट दाखिल नहीं की है.

कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि इस याचिका के दाखिल होने के छह साल बाद भी सरकार ने एनजीओ के नियमन के लिए कोई तंत्र विकसित नहीं किया. केन्द्र और उसके विभागों ने करोड़ों रुपये उन्हें फंड दिए लेकिन वे इससे अवगत नहीं हैं कि आडिट न होने का क्या प्रभाव है. कोर्ट ने स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कपार्ट के महानिदेशक को कोर्ट में बुलाया था. जो कि दोपहर दो बजे कोर्ट में पेश हुए.कोर्ट ने कहा कि हिसाब किताब न देने पर सिर्फ एनजीओ को ब्लैक लिस्ट किया जाता है. ये काफी नहीं है फंड का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई होनी चाहिए.

कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार और उसके विभागों के बीच एनजीओ की आडिटिंग (लेखाजोखा) को लेकर और वित्त मंत्रालय द्वारा जारी जनरल फाइनेंशियल रूल 2005 को लागू करने के बारे में भ्रम है. कोर्ट ने ग्र्रामीण विकास मंत्रालय और कपार्ट तथा अन्य जिम्मेदार एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे 31 मार्च तक नियमों के मुताबिक सभी एनजीओ का आडिट पूरा कर के सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की जाए.कोर्ट ने कहा कि जो एनजीओ बैलेंस शीट देकर अपना लेखाजोखा न दें उनके खिलाफ वसूली के लिए सिविल और दीवानी कार्रवाई हो. पीठ ने इस बारे में सरकार को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है साथ ही कहा है कि हलफनामा दाखिल करने वाला अधिकारी आइएएस अधिकारी होना चाहिए जो कि संयुक्त सचिव स्तर से नीचे का नहीं होगा साथ ही हलफनामा विभाग के सचिव से मंजूर होना चाहिए. कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह एनजीओ को नियमित करने उनकी मान्यता व उन्हें फंड जारी करने से लेकर हिसाब किताब लेने तक के दिशानिर्देश तय करे.

(Source: https://khabar.ndtv.com)

6,000 NGOs not Filed Income Detail and return to Home Ministry

Home Ministry issued show cause notices to 6,000 NGOs on July 8 for not filing annual income and expenditure records for five consecutive years. The NGOs can reply upto  July 23, otherwise their FCRA will be cancelled.

Home Ministry has given one-time opportunity in May to 18,523 NGOs to give details of their income and expenses by June 14. The NGOs, registered under FCRA, which allows them to receive foreign donations, were told to submit their annual returns for five years from 2010-11 to 2014-15. It was given an opportunity for one month to file their missing annual returns by June 14 without paying any penalty.

In spite of sufficient and adequate notice 5,922 NGOS have not submitted their annual returns for three or more than three years within the stipulated time given in the notice. Now the NGOs have been requested to reply by July 23, failing which it will be presumed that they have nothing to say and action will be taken by the Home Ministry under the FCRA, it said. According to the FCRA registration for receiving foreign funds the annual returns mujt be uploaded on the FCRA website by the NGO.
(Source: NDTV News)

NGO opposed and questioned for taking wrong fees by colleges

Pune. While Class XI admissions at aided junior colleges for in-house and management quota are already over, a non-governmental organisation (NGO) has questioned the basis on which the admissions have taken place, especially when the government has not yet declared the fee structure for this year.

The government decides the fee to be charged in aided divisions of a college without which admissions cannot be confirmed to students. Education department officials have said that the colleges have been told to maintain last year’s fees until the committee formed to regulate the junior college fees decides on a completely new fee structure.

“The fee for all aided colleges is decided by the state government which is around Rs 330 for a year. But the colleges don’t follow this and charge Rs 6,000-7,000 per student under various categories such as development fee, extra-curricular activities fee, among others. We had protested against this practice last year too.

The government had then instituted a committee under the commissioner of education, which was supposed to declare the fee for this year,” said Vaishali Bafna, member of SYSCOM, the NGO that has lodged a protest.

The fee of about Rs 330 per year was decided about four decades ago and the same was even printed in the information booklet till last year but if the colleges needed to revise it, they should have gone to the government rather than increasing it on their own, the NGO added.

Bafna further said that while the first round of admission is yet to take place, the in-house quota admissions are already over, despite there being no declaration of fee from the government.

“On what basis have the admissions taken place? To confirm your admission, full fee has to be taken from the students. In their race to get into a good college, students don’t bother about fees and renowned institutions have been taking advantage of them by increasing the fees,” said Bafna.

A total of 10,231 seats have been filled in the quota round and the remaining seats will not be merged into the general rounds. The students who have confirmed their admissions in quota rounds will not be allowed to take part in any of the general rounds. The Deputy director of education for Pune division Dinkar Temkar said, “The new fee has not been declared and hence we have asked all colleges to go by the old fee. The colleges cannot increase the fee and if they do, strict action will be taken against them.” Temkar added, “The new committee will take some time to formulate the new fee which may be same for all colleges. Till now, all aided colleges have been charging fees as per the facilities provided by them.”

(Source: http://timesofindia.indiatimes.com)

SBI Foundation donated fund for children food kitchen

Bengaluru: March, 2017: The Akshaya Patra Foundation received a donation of INR 88 lakhs from SBI Foundation. The money is donated by the CSR wing of State Bank group. This donation will be invested towards 1250 Hot Insulated Vessels to keep food hot for 8-10 hours. The insulated hot boxes would be distributed amongst Bengaluru, Ahmedabad, Guwahati and Nathdwara kitchens. The cheque of INR 88, 08, 400 was given to Akshaya Patra on 27 March, 2017 at ISCKON, Bangalore.

Speaking on this occasion Shri Narottham Reddy, President & COO, SBI Foundation said “We are proud to be partnering with Akshaya Patra which is working towards eradicating malnutrition in India, and happy that these Hot Insulated Vessels will be instrumental in delivering hot and nutritious meal to the children. We look forward to a long term association with the Foundation”.

Acharya Ratna Dasa, Chief Project Manager, Akshaya Patra said “We are over whelmed by the support from SBI Foundation. We take pride in being the first NGO to receive aid by SBI Foundation and we profusely thank them for associating with us”.

About The Akshaya Patra Foundation: The Akshaya Patra Foundation is a not-for-profit organisation headquartered in Bengaluru, India. The organisation strives to fight issues like hunger and malnutrition in India. By implementing the Mid-Day Meal Scheme in the Government schools and Government-aided schools, Akshaya Patra aims not only to fight hunger but also to bring children to school. Since 2000, the organisation has worked towards reaching more children with wholesome food on every single school day. Akshaya Patra is continuously leveraging technology to cater to millions of children. Its state-of-the-art kitchens have become a subject of study and attract curious visitors from around the world.

In partnership with the Government of India and various State Governments and inestimable support from many philanthropic donors and well-wishers, Akshaya Patra has grown from humble beginnings serving just 1,500 school children across five schools. Today, The Akshaya Patra Foundation is the world’s largest (not-for-profit run) Mid-Day Meal Programme serving wholesome food to over 1.6 million children from 13,529 schools across 11 states in India.

About SBI Foundation: The SBI Foundation aims to be the leading institution for promoting growth and equality, responsive to the relevant needs of communities where it operates. SBI Foundation puts forth itself a larger aim of being a responsible Corporate Citizen, by contributing to nation building through CSR activities, in true letter and spirit.

NGO providing meals to kids to lower dropout rates

Akshay Patra Foundation’s kitchens provide nutritious meals to children in govt, civic schools; goal is to lower dropout rates

An NGO that runs 29 kitchens supplying mid-day meals to children in studying in 13,500 government schools across India is soon set to offer the service in the city.

Since June 15, the Bangalore-based Akshaya Patra Foundation has been sending meals for 5,000 children studying at 24 municipal schools in Thane. And plans are afoot to purchase a 1.5- acre plot of land for a kitchen to feed 50,000 schoolchildren at BMC-run schools in the city.

Akshaya Patra literally means “unlimited vessel”, and true to its name, the organisation aims to provide nutritious meals to malnourished schoolchildren, and ultimately help bring down the high dropout rate in government and municipal schools.

Seema F, 20, an MSc student at Mount Carmel, Bangalore, has been a recipient of Aksay Patra’s mid-day meals. “My father is a tailor and my mother had no income. We are three siblings and my brother discontinued studies after Std XI. We would come to school on an empty stomach on most days and were unable to concentrate on studying. We looked forward to the lunch bell at 12.45 pm; the hearty meal would give us energy till 4 pm. On Wednesdays and Saturdays, we would even get dessert,” said Seema.

B S Saraswathi, 25, who is doing a Phd in Biotechnology from Bangalore University, also remembers the mid-day meals she got in school. “The food comes packed with solid nutrients. Many students who had discontinued their studies went back to school because these meals were a big motivation. It even relieved the burden of our parents, who were unable to provide us even with one square meal a day,” said Saraswathi.

“We plan to open a baby kitchen with the capacity to feed 50,000 students in Mumbai. But it is difficult to get land. Our recipes include peanut butter and are formulated by top chefs in India.

We add micronutrients and vitamins to rice flour, which is then processed in machines to pull out metals. There is a destoning machine to remove stones, and another machine to separate broken rice, which is then used to make idlis. We also have an automated roti machine that makes 3,500 chapattis in an hour in our two-storey kitchen in Thane,”said Vandana Tilak, president, Akshaya Patra Foundation, Maharashtra, and member of the US board of directors.

Care is taken to ensure that the food packed in the kitchens and sent to schools remains hot for up to three hours.

“We use insulated vessels, and the temperature of the food is checked before it reaches the transport vehicle, at 8.30 am. There’s a flurry of activity in the Thane kitchen at 5 am, and by 11am, the lunches reach 12 municipal schools situated along the same route. The temperature is maintained at 85 degrees C in the kitchen, and 65 degrees C once it reaches the schools. There are labs in every city to test the quality of the food,”

(Source: http://mumbaimirror.indiatimes.com)

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